समय ऐसा है कि सामान्य सर्दी-जुकाम होने पर भी यह डर बैठ सकता है कि कहीं यह कोविड-19 का संक्रमण तो नहीं। खासकर, बुजुर्गों में इस बात को लेकर ज्यादा डर होना तो बिलकुल अस्वाभाविक नहीं है। पर, बुजुर्गों को हर समय डरने की जरूरत नहीं है। उनके डर को कैसे दूर करें, इस बारे में बता रहे हैं, दिल्ली के इहबास में साइकिएट्री के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विजेंदर सिंह-
प्रश्न: पिताजी को जुकाम हुआ था। फैमिली डॉक्टर ने फोन पर कहा, सर्दी-जुकाम के लक्षण हैं। पर, पिताजी डरे रहते हैं कि उन्हें कोरोना हो गया है, क्या करें?
बुजुर्ग अपने शौक को वक्त जरूर दें। हर दिन एक तयशुदा दिनचर्या का पालन करें। सुबह उठ कर कुछ देर व्यायाम करें, नाश्ता करें, फोन पर दोस्तों से बात करें, फिल्में देखें, बागवानी करें, खाना पकाएं। प्रोटीनयुक्त डाइट लें। साथ ही नियमित योग-प्राणायाम करें और शराब आदि से दूर रहें।
बहुत सारे मानसिक स्वास्थ्य अस्पतालों या एक्सपर्ट्स ने लॉकडाउन के दौरान होने वाली मानसिक समस्याओं को देखते हुए हेल्पलाइन शुरू की है। इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (इहबास), दिल्ली ने भी ऐसी दो हेल्पलाइन शुरू की हैं। यहां की टेली कंसल्टेशन हेल्पलाइन का नंबर है 9868396824, जिस पर चिकित्सकों से बात हो सकती है। वहीं टेली काउंसलिंग हेल्पलाइन का नंबर है 9868396841, जिस पर काउंसलर लोगों की काउंसलिंग करेंगे। इन हेल्पलाइन पर कॉल करने का समय सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक है। इस किस्म की हेल्पलाइन से बुजुर्ग घर बैठे मदद ले सकते हैं।
बीस दिन तक अगर बुखार या खांसी जैसी कोई समस्या नहीं हुई, तो आपके पारिवारिक डॉक्टर एकदम सही कह रहे हैं। अब आते हैं, उनकी मानसिक समस्या पर। क्या आपके पिताजी को पहले कभी जरूरत से ज्यादा चिंता और बेचैनी जैसे लक्षण रहे हैं? अगर हां, तो ऐसे माहौल में उनकी यह मानसिक प्रवृत्ति बढ़ सकती है, इसकी आशंका है। कभी-कभी मानसिक समस्याओं के साथ कुछ शारीरिक लक्षण भी नजर आते हैं, जैसे दिल की धड़कनें अचानक बढ़ जाना, शरीर में कंपन होने लगना या नींद आने में दिक्कत होना। ऐसे लक्षण ‘सिंड्रोमल सिम्प्टम्स’ कहलाते हैं। अगर ये नजर आ रहे हैं तो तुरंत फोन पर किसी मानसिक रोग विशेषज्ञ की सलाह लें। वहीं, अगर आपके पिताजी सिर्फ कोरोना बीमारी को लेकर ज्यादा सोचते हैं, तो बहुत चिंता की बात नहीं है। इस दौर में बुजुर्गों को कुछ सावधानियों का पालन जरूर करना चाहिए।
बुजुर्ग अपने शौक को वक्त जरूर दें। हर दिन एक तयशुदा दिनचर्या का पालन करें। सुबह उठ कर कुछ देर व्यायाम करें, नाश्ता करें, फोन पर दोस्तों से बात करें, फिल्में देखें, बागवानी करें, खाना पकाएं। प्रोटीनयुक्त डाइट लें। साथ ही नियमित योग-प्राणायाम करें और शराब आदि से दूर रहें।
बहुत सारे मानसिक स्वास्थ्य अस्पतालों या एक्सपर्ट्स ने लॉकडाउन के दौरान होने वाली मानसिक समस्याओं को देखते हुए हेल्पलाइन शुरू की है। इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (इहबास), दिल्ली ने भी ऐसी दो हेल्पलाइन शुरू की हैं। यहां की टेली कंसल्टेशन हेल्पलाइन का नंबर है 9868396824, जिस पर चिकित्सकों से बात हो सकती है। वहीं टेली काउंसलिंग हेल्पलाइन का नंबर है 9868396841, जिस पर काउंसलर लोगों की काउंसलिंग करेंगे। इन हेल्पलाइन पर कॉल करने का समय सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक है। इस किस्म की हेल्पलाइन से बुजुर्ग घर बैठे मदद ले सकते हैं।
बीस दिन तक अगर बुखार या खांसी जैसी कोई समस्या नहीं हुई, तो आपके पारिवारिक डॉक्टर एकदम सही कह रहे हैं। अब आते हैं, उनकी मानसिक समस्या पर। क्या आपके पिताजी को पहले कभी जरूरत से ज्यादा चिंता और बेचैनी जैसे लक्षण रहे हैं? अगर हां, तो ऐसे माहौल में उनकी यह मानसिक प्रवृत्ति बढ़ सकती है, इसकी आशंका है। कभी-कभी मानसिक समस्याओं के साथ कुछ शारीरिक लक्षण भी नजर आते हैं, जैसे दिल की धड़कनें अचानक बढ़ जाना, शरीर में कंपन होने लगना या नींद आने में दिक्कत होना। ऐसे लक्षण ‘सिंड्रोमल सिम्प्टम्स’ कहलाते हैं। अगर ये नजर आ रहे हैं तो तुरंत फोन पर किसी मानसिक रोग विशेषज्ञ की सलाह लें। वहीं, अगर आपके पिताजी सिर्फ कोरोना बीमारी को लेकर ज्यादा सोचते हैं, तो बहुत चिंता की बात नहीं है। इस दौर में बुजुर्गों को कुछ सावधानियों का पालन जरूर करना चाहिए।

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