बिहार के मुख्य सचिव फेफड़े के कैंसर से पीड़ित थे,ईलाज एम्स में चल रहा था,लेकिन कोरोना के आते हीं फेफड़े का कैंसर छुट्टी पर चला गया था,इसलिए इनकी मौत की वजह कोरोना है।
यह एक अरुण कुमार सिंह की कहानी नहीं है,ऐसे अनेकों लोग हैं, जिनमें कोरोना आने के तुरंत पहले उनका मधुमेह जो खतरनाक लेबल तक रहता था, हृदयाघात, अस्थमा,किडनी आदि वाला रोग सब समर वैकेशन पर चला गया और उनकी मृत्यु कोरोना से हो गयी।
अजीब खेल चल रहा है, पूरी तरह से डकैती की जा रही है,मानवीय संवेदना त्राहि त्राहि कर रही है। निर्लज्जता अपनी पराकाष्ठा पर है।
कल पटना से एक मित्र ने बताया कि बीस रुपये का पानी बोतल रोगी तक पहुंचाने के लिए 100 रुपया देना पङता हैं। एम्बुलेंस वाला एक हास्पीटल से दूसरे हास्पीटल के लिए 12 हजार ले रहा है! प्राईवेट अस्पताल वाला पेशेंट आते हीं एक लाख जमा करवाता है और ऑक्सीजन के नाम पर खाली नोजल नाक में ठूंस कर,बस परिजन को तसल्ली दिलाता है कि...हाँ ऑक्सीजन दिया जा रहा है।
थोङी देर में रोगी मर जाता है। ये सच्चाई है कोरोना के नाम पर होने वाले ईलाज का।
डाक्टर त्रेहान कहते हैं, उनके यहाँ हजार पेशेंट हैं, लेकिन मात्र दो लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत पङी है,फिर अन्य अस्पताल में ये तमाशा क्यों चल रहा है....?
ये क्यों कर हो रहा है .....विचार करिएगा .... !! ये बाजार ने ,जो हमारे अंदर कोरोना का खौफ भरा, अन्य बीमारी से मृत्यु होने के बावजूद.....मौत का कारण कोरोना बताया गया.... बङे-बङे हाई-फाई पर्सनैलिटी के मृत्यु में उनके अन्य गंभीर बीमारी को छुपाकर...उनकी मृत्यु की वजह कोरोना बताकर....जोर-शोर से प्रचारित कर हमारे दिमाग में यह बैठा दिया गया कि जब इतने बङे लोग न बचे तो तुम किस खेत की मूली हो....नतीजा लोग अपना सबकुछ लूटाने को खूद तैयार हो गए...!
एकबार जब ये खौफ जनमानस आया नहीं कि मौत के धंधेबाजों की पौ-बारह....!
आज हमें ऑक्सीजन या अन्य जीवन रक्षक सामग्रियों के लिए जो मारा-मारी दिख रही है, उसके पीछे और कुछ नहीं बस वो खौफ है..!मृत्यु का खौफ....क्यों भई...कौन यहाँ अमरत्व ले के आया है....जो जीने के लिए इतनी जद्दोजहद.....!
पिछले 5 दिनों की मैं अपनी हालत आपको बताता,तो आप मेरे लिए भी दुआ कर रहे होते, यकीन मानिये बिना एक भी एलोपैथिक दवा लिए सिर्फ अपने रसोईघर में उपलब्ध सामग्री और होमियोपैथ की तीन दवाओं के सहारे आज इस स्थिति में हूँ कि खम ठोंक कर बोल रहा हूँ .. . कृपया इन गिद्धों के आगे खुद को न परोसिए।अपने को इन लुटेरों से बचाईए।
अपने सनातनी परंपरागत उपाए को आजमाइए ....आप स्वस्थ थे/हैं और रहेंगे ....बस शर्त इतनी खौफ के इस चेन को काट फेकिए।
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